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वन स्टॉप सेंटर को महिला हेल्पलाइन से जोड़ा गया, ताकि तालमेल मजबूत हो सके और सहायता सेवाओं तक निर्बाध पहुंच सुनिश्चित हो सके

  वन स्टॉप सेंटर हिंसा से पीडि़त और संकटग्रस्त महिलाओं को एक ही जगह एकीकृत और तत्कााल सहायता एवं मदद प्रदान करता है , दीर्घकालिक संस्थािगत सहायता , पुनर्वास और सुरक्षित आवास की आवश्यककता वाली महिलाओं के रेफरल के लिए ओएससी को ‘शक्ति सदन’ से भी एकीकृत किया गया   वन स्टॉप सेंटर (ओएससी) मिशन शक्ति के अंतर्गत ‘संबल’ घटक का एक महत्‍वपूर्ण अंग है। यह देशभर में निजी एवं सार्वजनिक दोनों प्रकार के स्‍थानों पर हिंसा से प्रभावित तथा संकटग्रस्‍त महिलाओं को एक ही जगह एकीकृत और तत्‍काल सहायता एवं मदद प्रदान करता है। अब तक , देशभर में 1,033 वन स्टॉप सेंटरों (ओएससी) को स्‍वीकृति प्रदान की जा चुकी है। इनमें से 985 वन स्टॉप सेंटर वर्तमान में संचालित हैं।  योजना की शुरुआत 1 अप्रैल , 2015 से 30 जून , 2026 तक , देशभर में 15.20 लाख से अधिक महिलाओं को सहायता प्रदान की जा चुकी है। केंद्र सरकार प्रत्‍येक ओएससी में 13 मानव संसाधनों की नियुक्ति/संविदा पर नियुक्ति के लिए राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को शत-‍प्रतिशत वित्‍तीय सहायता उपलब्‍ध कराती है। इनमें 1 केंद्र प्रशासक , 2 प्रकरणकर्मी ,...
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सरकार ने सोशल मीडिया पर बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी सामग्री के खिलाफ सख्त कार्रवाई करके बच्चों के लिए ऑनलाइन सुरक्षा को मजबूत किया

  सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को गैर-कानूनी और नुकसानदायक कंटेंट के खिलाफ तेजी से कार्रवाई करने की जरूरत , इंटरनेट यूजर्स की सुरक्षा बढ़ाने के उद्देश्यय से कंटेंट को हटाने की टाइमलाइन जल्द से जल्दन होनी चाहिए और जांच-पड़ताल की प्रणाली मजबूत होनी चाहिए सरकार की नीति का उद्देश्‍य महिलाओं और बच्चों समेत इंटरनेट यूजर के लिए एक खुला , सुरक्षित , भरोसेमंद और जवाबदेह इंटरनेट सुनिश्चित करना है। सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम और सूचना प्रौद्योगिकी (मध्‍यवर्ती मार्गनिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियमावली , 2021 ने मिलकर डिजिटल स्पेस में गैर-कानूनी और नुकसानदायक कंटेंट से निपटने के लिए एक सख्त ढांचा बनाया है। सोशल मीडिया पर सीएसएएम सामग्री: भारत सरकार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बाल यौन शोषण सामग्री (सीएसएएम) से जुड़े विज्ञापन के फैलने की खबरों को गंभीरता से लिया है और संबंधित मध्‍यवर्ती संगठन से विस्‍तृत रिपोर्ट मांगी है। राष्‍ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) ने भी संबंधित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को नोटिस जारी किया है। सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) अधिनियम , 2000 ( आईटी अधिनियम) ...

आंतरिक और स्थानीय समितियों के लिए जांच प्रक्रियाओं पर पुस्तिका जारी, कार्यस्थल पर सुरक्षा को मजबूत करना, कार्यबल में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना और समावेशी राष्ट्रीय विकास हासिल करने के लिए यह अत्‍यंत महत्‍वपूर्ण है: श्रीमती अन्नपूर्णा देवी

विज्ञान भवन में पॉश एक्ट पर दो दिवसीय राष्ट्रीय जागरूकता कार्यक्रम का शुभारंभ,  कार्यस्थल पर सुरक्षा को मजबूत करना , कार्यबल में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना और समावेशी राष्ट्रीय विकास हासिल करने के लिए यह अत्‍यंत महत्‍वपूर्ण है: श्रीमती अन्नपूर्णा देवी आंतरिक और स्थानीय समितियों के लिए जांच प्रक्रियाओं पर पुस्तिका जारी कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न (रोकथाम , निषेध और निवारण) अधिनियम , 2013 पर राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्‍ल्‍यू) के दो दिवसीय राष्ट्रीय जागरूकता कार्यक्रम का आज नई दिल्ली के विज्ञान भवन में शुभारंभ हुआ। इस कार्यक्रम में केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती अन्नपूर्णा देवी मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल हुईं। राष्ट्रीय महिला आयोग द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में वरिष्ठ सरकारी अधिकारी , कानूनी विशेषज्ञ , आंतरिक और स्थानीय समितियों के प्रतिनिधि , नागरिक समाज संगठन और अन्य हितधारक पॉश अधिनियम के बारे में जागरूकता बढ़ाने और इसे बेहतर ढंग से लागू किए जाने से जुड़ी चर्चाओं के लिए एक साथ उपस्थिति रहे। श्रीमती अन्नपूर्णा देवी ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि मह...

एसएचई-बॉक्‍स 2.0 ने कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध और निवारण) अधिनियम, 2013 के कार्यान्वयन को किया मजबूत

  केद्र सरकार महिलाओं के लिए एक सुरक्षित , समावेशी और सशक्त इकोसिस्‍टम को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध , एसएचई-बॉक्‍स 2.0   ने  कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न (रोकथाम , निषेध और निवारण) अधिनियम , 2013 के कार्यान्वयन को किया मजबूत यह एक सशक्‍त प्रौद्योगिकी-सक्षम प्लेटफॉर्म है , जो महिलाओं को कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न की शिकायतों को दर्ज करने और उनकी प्रगति पर नजर रखने के लिए एकल-खिडकी सुविधा प्रदान करता है , केंद्र सरकार ने विभिन्न क्षेत्रों में महिलाओं की सुरक्षा , गरिमा और भागीदारी को बढ़ाने के लिए कई संरचनात्मक और नीतिगत कदम उठाए हैं। इनमें से एक प्रमुख क्षेत्र सुरक्षित कार्यस्थलों का निर्माण रहा है , जो महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण और कार्यबल में उनकी निरंतर भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक है। इस दिशा में महिलाओं की सुरक्षा , संरक्षा और सशक्तिकरण के लिए सरकार का प्रमुख कार्यक्रम , मिशन शक्ति , योजनाओं के समन्वय और संस्थागत तंत्रों को मजबूत करने के लिए एक एकीकृत ढांचा प्रदान करता है। यह देश भर में महिलाओं के लिए कानूनों और सुरक्षा उपायों के प्रभावी कार्या...

(SHe-Box 2.0) एक सुरक्षित, गोपनीय आणि वापरण्यास अतिशय सोपे असे पोर्टल आहे. या पोर्टलमुळे महिलांना कोणतीही भीती, लज्जा न बाळगता अथवा कोणी आपला सूड उगवेल याचे भय न बाळगता घटनेची तक्रार करण्यास बळ मिळते

महिलांसाठी सुरक्षित , सर्वसमावेशक आणि सशक्त परिसंस्था – SHe-Box 2.0 ( संक्षिप्त सारांश) केंद्र सरकार महिलांसाठी सुरक्षित , सन्मानजनक आणि सर्वसमावेशक कार्यस्थळ निर्माण करण्यासाठी वचनबद्ध आहे. महिलांच्या आर्थिक सक्षमीकरणासाठी आणि रोजगारातील सातत्यपूर्ण सहभागासाठी सुरक्षित कार्यस्थळांवर भर देण्यात आला आहे. मिशन शक्ती अंतर्गत महिलांची सुरक्षा , संरक्षण आणि सक्षमीकरणासाठी विविध योजना आणि संस्थात्मक यंत्रणा एकत्रितपणे राबवल्या जात आहेत. कामाच्या ठिकाणी महिलांचा लैंगिक छळ (प्रतिबंध , मनाई आणि निवारण) अधिनियम , 2013 (POSH Act) प्रभावीपणे राबवण्यासाठी SHe-Box 2.0 पोर्टल विकसित करण्यात आले आहे. पूर्वीच्या SHe-Box पेक्षा SHe-Box 2.0 अधिक व्यापक , पारदर्शक आणि उत्तरदायी डिजिटल तक्रार निवारण प्रणाली उपलब्ध करून देते. SHe-Box 2.0 ची प्रमुख वैशिष्ट्ये कार्यस्थळी लैंगिक छळाच्या तक्रारी ऑनलाइन नोंदविण्याची सुविधा. तक्रारींच्या प्रगतीवर ऑनलाइन देखरेख ठेवण्याची सुविधा. राज...

कार्यस्थल पर महिला सुरक्षा: जानिए आंतरिक शिकायत समिति (ICC) और कामकाजी महिलाओं के अपने व्यक्तिगत कानूनी अधिकार जो किसी भी कार्यस्थल पर महिलाओं द्वारा अभिप्राप्त करने का अधिकार भारतीय संविधान देता है ।

आंतरिक शिकायत समिति ICC से परिचय (Introduction with Internal complains committee)  सुरक्षित और सम्मानजनक माहौल पाने का पूरा हक प्रत्येक कामकाजी महिला का है जिसकी सुनिश्चितता करवाती है POSH एक्ट 2013 के तहत गठित कार्यालय की ICC  भारत में हर कामकाजी महिला को एक सुरक्षित और सम्मानजनक माहौल पाने का पूरा हक है। अक्सर जागरूकता की कमी के कारण महिलाएं दफ्तरों में होने वाले दुर्व्यवहार पर चुप रह जाती हैं, इसलिए POSH एक्ट 2013 की पूरी जानकारी होना हर महिला के लिए आवश्यक है। इस कानून के तहत 10 या उससे अधिक कर्मचारियों वाले हर संस्थान में आंतरिक शिकायत समिति गठित किया जाना अनिवार्य है । इसीलिए यह कानून क्या है और इसका गठन कैसे होता है, यह जानना बेहद ज़रूरी है। यदि आप भी किसी समस्या का सामना कर रही हैं, तो डरें नहीं; कार्यस्थल पर प्रताड़ना की शिकायत कहाँ करें और ICC में शिकायत दर्ज करने की समय सीमा क्या है, इसकी पूरी कानूनी प्रक्रिया समझना ही आपके सशक्तिकरण की पहली सीढ़ी है। आंतरिक शिकायत समिति (ICC) का गठन कैसे होता है?  कानून के अनुसार, यदि किसी सरकारी या निजी संस्थान में 10 से अधिक...

यौन उत्पीड़न इलेक्ट्रॉनिक बॉक्स (शी-बॉक्स) पोर्टल- कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न अधिनियम, 2013 के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए एक डिजिटल शासन पहल

 यौन उत्पीड़न इलेक्ट्रॉनिक बॉक्स (शी-बॉक्स) पोर्टल -   कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न (रोकथाम , निषेध और निवारण) अधिनियम (पीओएसएच अधिनियम) , 2013 के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए महिला एवं बाल विकास मंत्रालय (एमडब्ल्यूसीडी) ने 29 अगस्त 2024 को एक डिजिटल शासन पहल के रूप में यौन उत्पीड़न इलेक्ट्रॉनिक बॉक्स (शी-बॉक्स) पोर्टल ( https://shebox.wcd.gov.in/ ) का शुभारंभ किया। 27 मार्च 2026 तक , सार्वजनिक और निजी दोनों क्षेत्रों में 10 से अधिक कर्मचारियों वाले 1,61000 से अधिक कार्यस्थलों को पोर्टल पर पंजीकृत किया जा चुका है। इनमें से , पंजीकृत कार्यस्थलों द्वारा 68,460 से अधिक आंतरिक समितियों (आईसी) का विवरण अपडेट किया जा चुका है। पोर्टल पर जिला स्तर की 777 स्थानीय समितियों (एलसी) का विवरण भी उपलब्ध है। विभिन्न क्षेत्रों में कार्यान्वयन को सुव्यवस्थित करने और व्यापक पहुंच के साथ निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने के लिए , एमडब्ल्यूसीडी कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय , श्रम एवं रोजगार मंत्रालय , वित्तीय सेवा विभाग , राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग , अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद , उ...

कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध और निवारण) अधिनियम, 2013 (एसएच अधिनियम) लागू किया, जिसका उद्देश्य सभी क्षेत्रों में महिलाओं के लिए सुरक्षित एवं संरक्षित कार्य वातावरण प्रदान करना है। यह अधिनियम सभी महिलाओं, चाहे उनकी आयु या रोजगार की स्थिति कुछ भी हो, पर लागू होता है। इसकी संरक्षा के दायरे में घरेलू कामगारों सहित सार्वजनिक व निजी, संगठित या असंगठित क्षेत्र के सभी कार्यस्थल आते हैं

  सरकार ने कार्यस्थल पर महिलाओं का यौन उत्पीड़न अधिनियम , 2013 को लागू किया , जिसका उद्देश्य सभी क्षेत्रों में महिलाओं के लिए सुरक्षित एवं संरक्षित कार्य वातावरण प्रदान करना है कार्यस्थल पर महिलाओं का यौन उत्पीड़न , भारत के संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 21 में निहित समानता , स्वतंत्रता और जीवन के मौलिक अधिकारों और अनुच्छेद 19(1)( जी) के तहत किसी भी पेशे को अपनाने या किसी भी व्यवसाय , व्यापार या कारोबार को चलाने के अधिकार , जिसमें सुरक्षित कार्य वातावरण भी शामिल है , का गंभीर उल्लंघन है। यौन उत्पीड़न एक असुरक्षित कार्य वातावरण का निर्माण करता है , जिससे श्रमशक्ति में महिलाओं की भागीदारी बाधित होती है और उनके आर्थिक सशक्तिकरण एवं समावेशी विकास के लक्ष्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। भारत सरकार ने कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न (रोकथाम , निषेध और निवारण) अधिनियम , 2013 ( एसएच अधिनियम) लागू किया , जिसका उद्देश्य सभी क्षेत्रों में महिलाओं के लिए सुरक्षित एवं संरक्षित कार्य वातावरण प्रदान करना है। यह अधिनियम सभी महिलाओं , चाहे उनकी आयु या रोजगार की स्थिति कुछ भी हो , पर लागू ...

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